मूंगफली की खेती: बेहतर मुनाफे के लिए सही तरीके
मूंगफली की फलियाँ जमीन के नीचे बनती हैं — इसीलिए हल्की मिट्टी, सुई बनने के समय कैल्शियम और लगातार नमी ही तय करती है कि फलियाँ कितनी बनेंगी और कमाई कितनी होगी।

मूंगफली एक फायदे की फसल है, बशर्ते इसे सही मिट्टी में उगाया जाए और फली बनने के समय पर्याप्त नमी और कैल्शियम मिले। पौधे में फूल जमीन के ऊपर आते हैं, फिर 'सुइयाँ' (पेग) नीचे मिट्टी में घुसती हैं जहाँ फलियाँ बनती हैं — इसीलिए जमीन के नीचे जो होता है, वही सबसे ज्यादा मायने रखता है।
सही मिट्टी और किस्म चुनें
मूंगफली हल्की, अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिट्टी में सबसे अच्छी होती है। भारी और पानी भरने वाली मिट्टी में बन रही फलियों का दम घुटता है और सड़न बढ़ती है। अपनी बारिश और फसल के मौसम की लंबाई के हिसाब से किस्म चुनें — पानी कम हो तो कम अवधि वाली किस्में, और जहाँ नमी पक्की हो वहाँ लंबी अवधि वाली किस्में।
बीज उपचार करें और सही बुवाई करें
बुवाई से पहले बीज का उपचार करें ताकि बीज जनित रोगों और शुरुआती कीटों से बचाव हो। पौधों के बीच सही दूरी रखें ताकि फसल की छतरी एक जैसी बने और सुइयों को मिट्टी में घुसने की जगह मिले। खेत में एक समान और मजबूत पौध ही अच्छी फली संख्या की नींव है।
सुई बनने के समय कैल्शियम दें
फलियों को ठीक से भरने के लिए मूंगफली को सुई वाले क्षेत्र में — यानी मिट्टी की ऊपरी परत में जहाँ फलियाँ बनती हैं — कैल्शियम चाहिए। इसीलिए कई इलाकों में फूल और सुई बनने के आसपास जिप्सम डाला जाता है। अंदाजे से डालने की बजाय मिट्टी की जाँच से जरूरत और सही मात्रा पक्की करें, ताकि न पैसा बर्बाद हो और न जरूरत से ज्यादा डले।
अहम अवस्थाओं पर पानी दें
फूल आने, सुई बनने और दाना भरने के समय फसल नमी के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील होती है। यही अवस्थाएँ तय करती हैं कि फलियाँ कितनी बनेंगी और कितनी अच्छी भरेंगी। सूखा और जलभराव दोनों से बचें — लगातार हल्की नमी सबसे अच्छी है।
टिक्का रोग और रस चूसने वाले कीटों से बचाव
टिक्का (पत्ती धब्बा) रोग और तरह-तरह के रस चूसने वाले कीट आम समस्याएँ हैं। खेत की जल्दी-जल्दी निगरानी करें और भारी छिड़काव से पहले एकीकृत (समन्वित) तरीके अपनाएँ। स्वस्थ और अच्छे पोषण वाले पौधे इन समस्याओं का सामना भी बेहतर करते हैं।
सही समय पर खुदाई और अच्छी सुखाई करें
फसल पकने पर ही खुदाई करें, जब फली के अंदर का रंग पका हुआ दिखे। खुदाई के बाद फलियों को अच्छी तरह सुखाएँ। ठीक से न सूखी मूंगफली में अफ्लाटॉक्सिन बन सकता है, जिससे गुणवत्ता, दाम और सुरक्षा — तीनों गिर जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मूंगफली में जिप्सम क्यों डाला जाता है?+
यह सुई वाले क्षेत्र में कैल्शियम देता है, जिससे फलियाँ अच्छी भरती हैं और गुणवत्ता सुधरती है; मात्रा मिट्टी की जाँच से पक्की करें।
मूंगफली के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी है?+
हल्की, अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट; भारी और जलभराव वाली मिट्टी से बचें।
मूंगफली की खुदाई कब करनी चाहिए?+
फसल पकने पर, और फिर गुणवत्ता बचाने व अफ्लाटॉक्सिन से बचने के लिए फलियों को अच्छी तरह सुखाएँ।




